थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )

Shayri, jokes, chutkale and much more...

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jack


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यदि प्रेमी से कोई गलती हो जाए

Posted On: 16 Jan, 2014  
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मस्ती मालगाड़ी में

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जब हुआ शादी के बाद प्यार !!

Posted On: 12 Dec, 2013  
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मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ में

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Romantic Poems: मैं जिससे प्यार करता हूं…

Posted On: 2 Dec, 2013  
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मस्ती मालगाड़ी में

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karva chauth: पति भी कर्ज से पिस रहा है !!

Posted On: 21 Oct, 2013  
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मस्ती मालगाड़ी में

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hi, mostly yahan par jyadatar ladko ki hi story post krte h, ldkia kam post krti h apni story but now my turn me school time me ek ldka tha first class me uska nam ravi tha. vo mera bhut acha dost tha lekin sirf dost meri us se ldai bhi hoti thi lekin vo kbi b seriously nhi leta tha meri study me vo hmesha help krta tha vo kafi intelligent bhi tha, vo bhut kam bat krta tha. ek bar uska friend circl kisi vjh se classteacher ki najar me bura ban gya class me ek ladki ki vjh se us din un sare dosto ki bhut pitai hui. mera freind ravi pure time rota rha usne lunch bhi nhi kiya mene us se bat nhi ki us din ese ese time bitta rha usnne sbse bat krna band kr dia aur chupchap ek kone me betha rhta tha me bhi us se kuch b ab frankly nhi puch pati thi lekin me uske liy concern thi. hm sixth class me the usne final ke xam bhi nhi diye kyoki vo bhut bimar ho gya tha lekin bad me usne xam de diye. usne dhire dhire school aana km kr dia tha. ek din subh attandce hone se phle ek sir hmari class me aaye aur unhone kha tumhari class ke ravi ki death ho gyi . me khamosh sare freindne dukh jataya uski bato ko yad krke class teacher ne bhi lekin mene kisi se bat nhi ki us din hmari class me padai b nhi hui me school se ghr ai aur bag ek tarf krke bhut roi mene us se last time bat bhi nhi ki thi. aur us se ye b ni pucha ki kya hua tuje tu chupchap ku rhat h use blood cancer tha usne kabi kisi ko kuch ni bataya tha...... tab se lekr aaj tak mera koi bhi itana acha freind nhi ban paya class me sayed me use bhul hi nhi pai bhut bache aaye lekin mera nature resrve type ka ho gya uske jane ke bad. aaj bhi vo meri yado me jinda h

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कहते है एक सवाल पहेली समझो या ज्ञान, ये तुम पर है अब तुम क्या समझो, ये क्या है सवाल ज्ञान का विज्ञान कहू या विज्ञान का ज्ञान, जेसे तुम समझो वेषा कहता हु इंसान, तुमने वेद शास्त्र, परान आदि सभी कुछ छआन लिया बताता, सोचो ये पागल क्या गाता, सब कुछ छआन लिया होता तो तू भी मेरे जेसा होता, सुनकर सब हस दिये बोले देखो मुरख को लगता हे पगला गया, हम सोच कर हस दिये अरे मे फिर से खवाबो मे चला गया, तभी खवाबो की उसी याद से एक याद की आवाज आई, और में फिर से उस याद की आवाज के पिछे पिछे आ गया, बस याद की धुन ही इतनी सुरीली थी की सब कुछ देख कर भी अनदेखा करता आ गया, महसुस करता रहा तन में आने का एहसास भी मगर उसकी चाह मे वो तन में आना भी याद ना रहा, मुड कर देखा तो वही रास्ता बंद होता आ गया, बस अब क्या करू में तो यहा आकर बड़ा होता आ गया, बस एक और याद थी बाकी वो धुन जिसके पिछे यहा आ गया, जब पलटकर देखा तो धुन ने हाथ थाम लीया, लगा वही एक वो धुन है जिसके पिछे यहा आ गया, धुन से जानुगा वो रास्ता का भेद जिसके पिछे पिछे उस रास्ता से यहा आ गया, सुनकर धुन मुस्करा दी चलो ये मेरे झासे मे आ गया, और पलटकर बोली देखो चारो और मुझ बिन तुमको नही कोई बतलाएगा, में ही जानु तु किस तरह यहा आ गया, बस सुनकर धुन की धवनी उसमे ही खोकर रह गया, धुन ले चली जीव को गोदी मे उठाए के, नही कुछ कर सका वो जीव आते ही धुन की धवनी में बंद हो गया, धुन गुनगुनाती और वो सुनता रहा सुनते सुनते युग बीत गया एक, जाते जाते युग में पुछ लिया केसे आया बतला दो युग बीत गया अब एक, बोली नही कुछ खास भेद रे बस इतना तु जान रे, तुमको में ही लेकर आई तु पुत्र में माता तेरी रे, पुरूष के संग मिलकर मेंने तुम को बनाया रे, तेरे आने से पहले तेरे रहने को ये घर बनाया रे, इस घर में तुमको करने हें कुछ काम रे, फिर लोटा ले चलुगी तुमको तेरे धाम रे, सुनकर वो माँयुस हुआ कभी मुसकाया कभी रोया रे !!!!!!! !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! आओ मानव जीवो बतलाता हु बदल जाता ह युग केसे रे, और आता ह अंडकार के उंदकर से नवयुग रे, जिस जिस को मालुम ह वो वो वो जान लो रे, आ ग्या समय एक याद आने का क्या क्या तुमने याद किया, वो नही काम आना रे, एक ही सवाल ह उसका क्या क्या याद ह तुमको रे, बस यही तुम फंस जाई गा रे, अब तो कर याद से तु सवाल, वरना महायाद की एक याद मे तु भी गुम चला जायगा रे, हे मानव कह रहा हु सच मगर केसे तु समझैगा रे, ये तुज को ही मालुम होगा रे, हम तो इतना जाने यही भासा को बास कर तुम समझता ह रे, फिर किस का एन्तजार ह क्या ज्यादा बोलना सत्य का साक्षी ह रे, अगर नही तो मानव जान ले कारण कोई भी हो रे, मगर युग बदलने का कारण किसी एक मानव जीव के लिये नही होता रे, ना ही वो धरती के लिया मानव और धरती तो उस कारण मे ह रे, मगर एक मानव उस कारण को जान सकता ह रे, देहसमय रहने तक ये मानव मे ताकत ह रे, मगर मानव को उसी ताकत का गुमान ह रे, उसको जीवन भर गुलाम बना कर रखता ह रे, और देह छोड़ने के बाद उसी गुमान का नशा जब टूटता ह रे, तो फिर एक बार ना सोने की कसम ही लेता ह रे, और फिर आने के लिया रोता ह रे, मगर आता उसी योनि मे ह रे, जिस की याद उस याद मे बंद ह रे, समय ना बेकार कर सोच क्या याद करना ह तुजको रे, जो तु भूल गया कोन ह क्या तु जान गया रे, अगर नही तो मरना ह क्या रे, भाग जा के जान ले जब तक तुज को मालुम ह ये स्वासा ह रे, इनसे ही कर सवाल क्या तुम हो रे, होगी तो देगी जवाब बस तु जवाब याद करना छोड़ दे रे, सब को मालुम करना ह तो मालुम करना छोड़ दे रे, जो मालुम ना हो उस को मालुम कर दूसरों को समझाना छोड़ दे रे, जो कहते ह समझा आ गया वो सब से आगे मरता ह रे, जो मरता मानव जीव को देख कर डर कर भागता ह रे, वही सवाल तलाश करता ह और मिलता भी उसको ही ह रे, नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला नही अब कोई जानन वाला क्या आप जाग गये हो मानव, अगर हा तो कैसे खुद को यकिन दिलाओगे रे, आप एक आंख से देख रहे है या दो आँखों से रे, कल्याण हो !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! पहला पन्ना या आखिरी पन्ना कहा से लिखु उस एक पल का सत्य समझ ही नही आता, क्या कुछ नही होकर चला गया उस एक पल मे, सब बिगङकर बन गया या यु कहो बनकर बिगङ गया उस एक पल मे, ना जाने कितना कुछ अपने अन्दर ही छुपा लिया उस एक पल ने, क्या कहु कैसै समझाऊ उस एक पल को, ना जाने कितने एक पल समा गये उस एक पल मे, क्या समझाऊ उस पल की कहानी क्या समझाऊ उस की दास्ता, जिसमे सब कुछ रूककर फिर शुरू हो गया, उस एक पल मे ना जाने कितने एक–एक पल के टुकङे होकर समा गये, फिर भी वो पल वही का वही रह गया, उस पल मे ना जाने कितने ही पल समाकर गुम हो गये, उस पल को खोजते-खोजते ना जाने कितने ही उस पल मे हमेशा के लिये गुम हो गये, कल भी छुपा था आज भी छुपा है, क्या है ऐसा उस पल के अंदर जिसमे न जाने कितने एक पल भी समाकर खो गए, अब तुम ही बतलाओ ए मानुष उस पल का कैसे तुम्हे राज समझाऊ, जिसमे एक-एक पल करके ना जाने कितने एक पल समा गए, मगर सवाल फिर भी वही का वही है, हम जानते उस एक-एक पल का आखिरी जवाब जहॉ तक है, उस एक पल को पकङ पाते है या जाते देख पाते है, नही ये जान पाते है क़्या हुआ उस आखिरी पल के बाद के पल मे, ना जाने कितने एक आखिरी पल खो गऐ उस आखिरी पल के बाद के पहले पल को तलाश करने मे, जँहा भी एक पल को खोज के देखा तो अगले पल के होने का अहसास दे गया, आखिरी एक पल जहॉ तक तलाश किया एक पल को, वो एक पल बढता ही चला गया, जहॉ तक भी उस पल मे उस एक पल की तलाश की, ना जाने कितना बडा लगा, मगर ना जाने कितने एक-एक पल आगे जाके देखा, उस पल के होने का एहसास तो मिला मगर वो पल फिर भी ना मिला, अब मानुष सोच रहा कैसे करू तलाश, उस एक पल के बाद के पल का रहस्य क्या है, उस एक पल के बाद का आश्चयॅ, वो पल ना मिले ना सही ये तो पता चले क्या है, उस एक आखिरी पल के बाद घटने वाले पहले पल का रहस्य, यही सोचकर दिया कदम बढाऐ, उस आखिरी पल मे फिर भी रहस्य का रहस्य ही रह गया, आखिरी पल भी मिल गया और उसके बाद का पहला पल भी मिल गया, मगर फिर तलाश अधुरी की अधुरी रह गयी, उस आखिरी एक पल और पहले एक पल के बीच वो पल फिर रह गया, कैसे करू तलाश कैसे देखु उस पल को जो दोनो के बीच आया तो सही मगर आकर चला गया, देखकर भी नही देखा वो पल आया भी और आकर चला भी गया, अगर ए मानुष तु मानता है ये सवाल है, तो दोनो के बीच ठहर जा, वही तुझे वो पल मिलेगा, जिसमे गति दिखाई देती है मगर होती नही, यही वो फैसले की घङी है जब तुझे उस पल मे फैसला करना है, जो दोनो के बीच तु खङा है यही सवाल है यही जवाब है, ना समझे वो अनाङी है, आखिरी पल मे फैसला कर ले रूककर बीच मे जाना है, फिर जो तु देखना चाहे वही पल पहला पल हो, ये फैसला तु बीच मे खङा होकर कर ले, जिस पल को तु चुन ले, वही तेरा पहला पल हो, इस घाटी मे उतरने को कितने है बेताब, मगर जान ले ए मानुष कितना आसान और कितना मुश्किल है, ये आखिरी पल और पहले पल के बीच पल का स्थान, उस पल पर पहुचने के वास्ते तुझे होना होगा दुर आखिरी और पहले पल से, दोनो की दुरी को बॉटना होगा, बॉटते ही दुरी दोनो के बीच की हो जाएगा तु दोनो के बीच, वही खङे होकर तुझे लेना है फैसला कौन सा हो तेरा अगला पहला पल, जान ले तु खङा नही होगा और खङा भी होगा, जब तु होगा खङा उन दोनो पल के बीच, होगा सभी एक-एक पल मे, मगर दोनो पलो को बॉट देना होगा तुझे बीचो-बीच, टुट जाएगा नाता तेरा सबसे कुछ पल कहो या वो एक पल जिसमे तु होगा सभी से दुर, वही जाकर लेना होगा अगले पहले पल कहा होना चाहता है तु, नही कर सकेगा जब तक तु ये सब करना है बैकार, नही कभी ये जान सकेगा दोनो एक पल के बीच का सच, और किसी भी तरह ना तु समझ पाएगा उस पल का सच, जो पहुचेगा वही जान पाएगा उस पल का सच, वो भी इतना ही वो एक आखिरी पल भी था और ये पहला पल भी है, फिर भी गुप्त रह जाएगा वो दोनो के बीच, छुट गया वो पल पकङ लो उसको, जिसे पकङकर पार उतर गये साधु सन्त और फकिर, मानुष देखता रह गया वो निकल गये बीचो-बीच बे रॅग !! -------------------------------------------------------------------------- भारत क्या कहु क्या है, गिनती करने यही मै बैठ गया पढने मै बैठ गया, सोच रहा था कैसे लिखु क्या-क्या लिखु क्या है भारत, सोच सोचकर थक गया कैसे लिखु भारत, निले सागर की गहराई तो माप भी लाऊ, पहले ये तो बताओ कौन यत्रं से भारत की गहराई माप कर लाऊ, धरती कहो तो क्या गुणगान सुनाऊ, हर गुणगान फिका लगता आगे इसके, ऋतु कहो तो हर ऋतु दस्तक देती भारत मे, नाम कहु तो हर नाम की दस्तक सुनती भारत मे, आदि को क्या बतलाऊ आदिमानव भी पहली बार उतरा था भारत मे, तीनो देव मिले आपस मे वो धरती का खडं भी है भारत मे, धरम कहु तो चारो धरम है मिलते भारत मे, वेंद शास्त्र और पुराण, गीता बाईबल और कुरान सब ही है इस भारत मे, सतगुरू साधु संन्त, पिर फकिर और ओलिया, ना जाने कितने भक्त शिरोमणी उतरे भारत मे, कितने ही वीरो ने लहु से सीचां वो धरती भी है भारत मे, कितने ही रागों की पहली दस्तक हुई जहॉं वो धरती भी है भारत मे, कितनी ही रागनियों की धुन जगी कितनी ही धुनों ने रूप सजाया भारत मे, कितने ही साधु सन्तो ने अलख जगाया कितने ही पिर फकिरो ने अल्हा को पाया भारत मे, कितने ही साजों की आवाज उठी, ईकतारें का तार यहा गुँजा वीणा की झन्कार उठी इस भारत मे, डमरू की धुन से लेकर शँखों का शंखनाद गुँजा इस भारत मे, पृकृति का हर रंग है खिलता इस भारत मे, साधु सन्तो ने काया भेद बताया इस भारत मे, एक-एक करके चारों युगों का भेद खुला इस भारत मे, हर युग के परमाण है मिलते पहले मानुष का भेंद है मिलता भारत मे, ज्योतिष के ज्ञान से लेकर विज्ञान के अनुमान तक सब ही रखा भारत मे, भावों के फुल यहा खिलते सिप मे मोती मिलते भारत मे, ना जाने कितने मानुष हिरे से चमके इस भारत मे, धरती रूपी चुनरी मे कितने मोती जङें इस भारत मे, कितनी ही माताओ के लाल भेंट चढे वो धरती है भारत मे, पिता के सपुत चढ गये हँसते-हँसते फाँसी वो धरती है इस भारत मे, कितनों ने बिता दिया जीवन अधेंरी कालकोठरियों मे वो धरती भारत मे, आज भी गुँज रहा बन एक सवाल भारत मे, क्या है कोई जो बता सके क्यु चढ गये वो फाँसी पे, आज भी गुँज रही उन माताओ की आहें वो धरती भी भारत मे, पुछ रही वो हर माता तुमसे बस एक सवाल वो धरती है इस भारत मे, जो चिख-चिखकर कहता खुद को भारतवासी रे, पुछ रही उनसे वो माताऐ क्या इस दिन के लिए भेँट चढा था मेरा लाल, एक सदी भी ना सभाल सके एक सपने को,क्या इसी आजादी पाने को दिया अपना लाल रे, क्या उस पल की कोई किमत नही खुन के आसुं पीकर हँसती रही वो माताऐ, अरे किस मिटटी के बन गये हो तुम ऐसी मिटटी तो ना थी भारत मे, पुछ रही वो माताऐ आज हर माँ से एक सवाल,क्या किम्मत लगाई हमारे लालो के लहुं की, जिस लहुं से वो कर गये तिलक तुम्हारे लालो को, क्या उनका लहुं माथें पे आया पसीना था जिसे पौंछकर चल दिये, वो भी किसी के लाल थे वो भी किसी के सपुत थे,वो भी किसी सुहागन के सरताज थे, वो भी बहन के भाई थे वो भी बच्चो के बाप थे, मै जानता हु नही किसी के पास जवाब रे,बस इतना तुम सुन लो मेरा जवाब रे, हर माता सुन ले आज जिनका है कोई लाल रे, क्या बीती होगी उन माताओ पर जिनके भेंट चढे वो लाल रे, तरसती रही होगी निगाहें देखने को अपने लाल को, जब-जब दिल मे उभरी होगी याद उस लाल की, एक टिस सी उभरी होगी दिल मे देखने को अपने लाल को, फिर रही होगी ढुढती निगाहें बस एक बार अपने लाल को, मगर वो भी जीते रहे देखकर तुम्हारे लाल को, क्या कोई मोल नही उन माता-पिता की आहों का, क्या कोई मोल नही उस नारी का जिसने काट दिया सिसकियों मे जीवन सारा, हाँ मै जानता हु वक्त नही अब ये जानने का, रखना तुम याद फिर अगर वो वक्त लौटा तो तुम याद करोगे, काश वो होते तो फिर से हम आजाद होते, मगर फिर ना कोई माता अपना लाल देगी, ना कोई पिता अपनी लाठी, ना बहन अपने भाई को देगी ना नारी देगी अपने सरताज को, सोचों कैसे फिर उन को जिन्दा करोगे, नही कोई रास्ता होगा बस सोचोगे और आहें भरोगे, और बस यही दिल से पुकार उठेगी काश वो होते, सभालो हिन्दवासियोँ अपने हिन्द को, रखो दिल मे सभांलकर हिन्दवासियों अपने हिन्द को !!!!!! !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! क्या बात हुई तुम ही तो दुखी बता रहे थे नशा माग रहे थे अब इस से बड़ा नशा और क्या बोलु नशा तो उस का करो फिर चाहे जो करके हो मगर नशा उस महा का ही होगा फिर तो नशे का आनंद ह वरना सब बेकार ये नशे का मामूली अंश हे मे तो उस नशा का कह रहा हु जिस नशा से ये जन्म ले रहा ह "शायरी इक शरारत भरी शाम है, हर सुख़न इक छलकता हुआ जाम है, जब ये प्याले ग़ज़ल के पिए तो लगा मयक़दा तो बिना बात बदनाम है" Yr bor met kr koi mest se sayeri bheg चोरी के स्ब्दो स क्या say something our सच Kya bat h Dil khus kr dita चलो आज का सत्संग हो ज्ञ "एक हम है की खुद नशे में है, एक तुम हो की खुद नशा तुम में है।" नशा ही तो जानना ह क्या ह Nesha pyar h nesha dosti h nesha he ant h ये नशे का मामूली अंश हे मे तो उस नशा का कह रहा हु जिस नशा से ये जन्म ले रहा ह "तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है, खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है, फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ दर्दे दिलवालों, यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है" महा नशा !!! महा दशा !!! महा शक्ति !!! महा वेदी !!!! महा लक्ष्मी !!! महा कुमारी !!! महा Yr bor met kr good night Sara nesa utar diya क्या बात हुई तुम ही तो दुखी बता रहे थे नशा माग रहे थे अब इस से बड़ा नशा और क्या बोलु नशा तो उस का करो फिर चाहे जो करके हो मगर नशा उस महा का ही होगा फिर तो नशे का आनंद ह वरना सब बेकार !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! महाराज के परणाम साधु ही सत्य है साधना ही सत्य है साधने पर लक्ष्य ही सत्य है लक्ष्य साधने मे किया कर्म भी सत्य होता है अगर वो मानव कल्याण के लिए हो लक्ष्य पर पहुचने पर मानव ही अवतार कहलाता है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मित्र और जाने अजुबे भी जिस अजुबे के सामने बोने लगते है कलिक अवतार के आने का वक्त आ गया है क्या पढें और गहनता से हर मानव विचार करे खास कर वो जरूर जो दानवों का त्रिपुर बनाने मे जाने अनजाने भी साथ दे रहा है मानव रूपी जीव का व धरती का दोहन दानवोँ के लिए बदं कर दो और दानव राजा ये आखिरी चेतावनी समझेँ अपनी त्रिलोक विजय की मिथ्या कामना को त्याग कर शिवशक्ति के शरणागत हो बुलबुले की चाहत छोड दे इसमे मानव का ही नही दानवोँ का भी विनाश तय है इस देह मात्र को अधिक आयु देने मात्र से तुम्हारा कल्याण नही होगा और ना ही एक आकाशगंगा से निकलने मे कितनी बार समझाया शब्द और ऊर्जा आकाशगंगा मे अलग हो ही नही सकते और अगर तुम आकाशगंगा से बाहर आ भी गये तो तुम्हारी भी ताकत आधी ही हो जाएगी फिर तुम्हे अपनी ताकत की ऊर्जा की पुर्ती के लिए किसी न किसी आकाशगंगा मे फिर से आना होगा मगर वो आकाशगंगा कौनसी होगी इसका चुनाव तुम कैसे करोगे क्योकि आकाशगंगाओ के बाहर तुम्हे कोई भी आकाशगंगा दिखाई ही नही देगी आकाशगंगाओ की समय चेन भी तो है ना कौन सी आकाशगंगा किस समय चेन पर होती है क्या वो एक है तो अब तुम ही सोचो तुमको इसमे से क्या चाहिए विश्वगुरू हिन्दुत्व हिन्द मे सतयुग का आगमन !!!!!!!!!!!!!! त्रिलोक विजेता विश्वगुरू शिव को नमनः महाराज के पर्णाम !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! जलती ज्योत तेरी बिन तेल बिन बाती, जागे दिन रैन और राती, आए नही जाए नही फिर भी हर जगह दरशाए, पल मे कर दे उजयारा ना समझ आए, हर मय के प्याले की हर बुंद मे तु है, जिन्दगी की आस मे तु है मौत के आगोश मे तु है, तु हर कण मे हर साँस मे तु, क्या लिखु तेरे लिए हर लिखे शब्द की स्याही मे तु, लिख तो दु मगर लिखा न जाए तु, जीवन के हर अहसास मे है तु, जिन्दगी को देखु तो मौत का अहसास है तु, मौत को देखु तो हर जगह जगमगाता उजयारा है तु, समझ तो लु मगर समझ ना आए, देख तो लु मगर देखा न जाए जान तो लु मगर जाना न जाए तु, क्या है कह तो दु मगर कहा न जाए, बस यही कहु तु नशा है जो चढाये ना चढे, चढे तो उतारा न जाए, दिखाई न दे तो दिखा भी दु समझ न आए तो समझा भी दु, पर क्या करू ऐ मुसाफिर तुमने तो कसम खाई है मर जाने की, हर रास्ता बन्द करके तु बैठा है और सोचता है दरवाजा ही नही है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! गंध रूपी सागर पाने को जल रहा, विरह ज्वाला मे मृगा जीव रे, ना ही कोई दिखता है रे, ना ही कछु समझ आये रे, भागा-भागा फिर रहा रे जीवन यु ही गवाऐ रे, बचपन खो दिया गंध को महक समझ के मानुष रे, आई जवानी और भरमाया गंध को महक समझकर गोते खाई रे, उठी विरह ज्वाला जब गंध की, फिरे डोलता पागल की तॉहि रे, नही मिली वो अरश से फरश तक फिर भी फिरे ढोलता उसके पिछे मानुष रे, गंध की विरह ज्वाला जला रही पल-पल, जब लग ढोलता रहा मन के आकाश मे, छाया रहा अधेंरा आँखो के सामने, एक तरफ दिखे रे चन्दा दुजी और सुरज आकाश मे, थक हारकर जब वो बैठा, देखा पलभर आकाश मे, क्या दिन क्या रात कहु, होता एक ही दिन आकाश मे, पलभर के लिए सब ठहर गया, ठहर गया आकाश रे, नही गति थी नही थी ध्वनि, सब ठहर गया आकाश मे, पल मे ही आया सामने एक दुजा आकाश रे, खुदी ही बनकर आया अपना सरजनहार रे, गुँज उठा शखंनाद ठहरे हुये आकाश मे, बिखर गये विणा के रंग, हो गया जीव के जीवन का आगाज रे, बह चली धार बन जीवन का आधार रे, अब तक चली थी राह अकेली, चलते-चलते अपनी ही परछाई, कब हो गयी राही ज्ञात रहा नही मानुष रे, फिर राही के संग हो चली राह, पकङ उंगली राही की राह लेके चली रे, मिलाय दिया बाकी राही से, भुल गया फिर राह को राही रे, राही खो गया दुजे राही मे, भुल गया फिर मंजिल अपनी रे, भुल गया उस राह को मानुष रे, अब खङा-खङा पुछे ये सवाल रे, सभी से पुछे खुद से ना पुछे सवाल रे, पुछ खुद से तु सवाल मिल जाएगा हर जवाब रे, देख पलटकर दिख जाएगा तुझको तेरा मुकाम रे, ना सवाल रहेगा ना जवाब रहेगा रे, जो रहेगा वो तु खुद ही रह जाएगा ! !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! हर आवाज मे एक ग़ुंज है हर लय मे एक ताल है, हर सास मे एक जीवन है हर चाहत मे एक नफरत है, हर ज़िंदगी मे एक मौत है हर शब्द मे एक शब्द है, हर शब्द मे एक विचार है हर विचार मे एक ख्याल है, हर ख्याल मे एक ख्वाब् है हर ख्वाब मे एक सच और एक झुठ है, हर सच का एक झुठ है हर झुठ का एक सच है, हर जीव का एक जीवन है हर जीवन का एक अन्त है, हर अन्त का भी एक अन्त है पैदा होना जीवन की शुरूआत है या अन्त की शुरूआत है, ना देख़े तो ज़ीवन क़ी शुरूआत है देख़े तो अन्त की शुरूआत है, जानकर भी अंजान है देख़े तो क़्या देखे हर किसी से पहचान है, वक़्त वो सय्य् है पत्ता-पत्ता जिसका गुलाम है, जानते है जीवन नही है फिर भी जीवन के गुलाम है, हर जीवन का अन्त है फिर भी न जाने क़्या गुमान है, भीङ मे खुद को देख कर सबको अपना बना बैठा है, भुल गया हर किसी से अनजान है, फिर भी ये कैसा गुमान सोचता है हर सय् उसकी गुलाम है !! !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! कलयुग ने जब पहला पग धरा धरती पर धुरी दुरी हो गई, दुरी फिर दिश हो गई, दिश घुम रही मुरत मे, मुरत घुम रही सुरत मे, सुरत घुम रही शिशे के दिल मे, शिशे के दिल मे एक वक़्त देखकर सो गई, आखँ खुली जब चारो ओर सुरत हो गई, सब को देखा सा लगता है, सब कुछ सुना सा लगता है, पर नही समझ अब आता है, कैसै खुद को माफ करू कैसे खुद को समझाऊ, जो दिखे जो सुनता है वही यहाँ सब हो रहा है, सुरत-सुरत मिलकर सुरॅती से सुरॅती मे खोई पङी है, सुरॅती मे बह रहा मुरती का जल, मुरती जल मे जीव घुम रहा, जीव खोए गया मुरती जल की लहरो मे, मुरती जल की लहरो मे जब-जब दुरी अवरूध हुई, तब-तब जीव भी अनुरूध होता है !! !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! मानव बन जोगी कर रहा तलाश गली-गली, बनाकर मन्दिर मस्जिद और शिवालय ढुड रहा एक शिव को, एक-एक करके अनेक शिवों मे ढुड रहा एक शिव को, कहा मिलेगे कैसे मिलेगा क्यु मिलेगा यह मालुम नही किसी को, बोल-बोलकर थक गया जयदेव सभी को, नही सुनने वाला नही कोई लहने वाला, खुद ही नाम रखे खुद सज्ञां दे रहा मानव, फिर खुद ही अपने को भी भुल गया मानव, भुल गया मानव भुल गया शिव की सुरत भुल गया वो मुरत, बस मन मे ये मान लिया अब शिव नही है आ सकता क्योकि कलयुग है चल रहा, हम पापी है हमको नही मिलेगा अब महादेव, बस कर सकते उसकी पुजा-वन्दना और जप-तप और वैराग, धिरे-धिरे भुल गया जप-तप और वैराग लगा पुजने पत्थर मानकर भगवान, नही किसी को रहा यकिन पत्थर मे भी हो सकते है भगवान, बस यही यकिन कैसे तु करेगा ये फैसला तु ही करता है इंसान, इसी फैसले को तेरे बदलने लेकर मुरत का आवरण लेकर आता है भगवान, एक-एक कर कहता है सब कोई-कोई सुनता है इंसान, सुनकर भी कुछ नही मथं पाते मुरख इंसान, क्योकि मानव ने मान लिया अब कलयुग है, मानव रूप मे अब नही आ सकते भगवान, धरम गुरूओ ने चला दई कलयुग की चाल, संभल ले मानव कलयुग की भी अन्त वैला चली आई है, फिर क्यु मान रहा कलयुग की, मारेगा तुझको भी जाते-जाते ये कलयुग, अब तो रूककर सुन घोर अधेंरा जिस और तु जा रहा, रूककर सुन ले मत भाग अ मानव, ----------------------------------------------------------------------------------- सब को मालुम हे ये ख्वाब है मगर फिर भी वो तो हर रात दिखावे के लिए सोता है वैसे वो जाग रहा है बस कुछ आराम के लिए आखों को झपका लेता है वरना तो वो जानता है ये ख्वाब है बस वो बात अलग है की मौत वाले ख्वाब पर मेरा बस नही है बाकी मुझको मालुम है ये एक ख्वाब है बस सब इसी विचार के बरमाण्डं मे सो रहे है मगर कोई भी जानता नही ह भारत वर्ल्ड गुरु बनेगा केसे ! 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This my reyal story Duniya me har bachha jabh peda hota he to wo apna kismet lekar peda hota he me bhi apna kismet lekar peda hua tha mera janam 23 February 1989 ko rat ke 12 baje janam hua tha. Har bachha peda hone ke bad wo phele apne papa ki godh me ya maa ki godh me rota he or hasta he lekin me me to jabh peda hua tha to peda kare bali wo maa to thi lekin papa khelane bale wo papa nhi the or me peda hone ke bad jabh se ankhe koli or wolna sikha he tabh se mene apne nani ko hi maa or papa samjha tha kyu me peda hone ke sab se phele uniki godh me roya tha or muje to ye bhi nhi pata tha ki me jinki godh me wo meri maa he ya meri nani lekin jabh me 5 saal ko hua jabh muje pata chala ki jinone muje wolna or chalna sikhaya wo meri maa nhi meri naani maa thi jabh muje pata chala ki meri maa koi or he or wo muje lene arhi he tabhme bhot khush hua tha lekin maa mili par 2 din ke liye ai thi mujese milne fir me 10 saal ko hogya tabh meri maa muje apne sath legai apne ghar jaha mera ek bada bhai or mere papa rhete the me bhor khush tha ki me apne papa or bhai ke sath rhene jarha hun lekin jabh me apne ghar dholpur phucha mere papa or maa ke bhich me jhagda hogya muje lekar kyu mere papa muje kabhi pasand nhi kar te unone to muje bachpan me hi mar dalne ko kaha tha meri maa ne lekin meri kismet thi ki muje is duniya ana tha meri bajase aye din gharme maa or papa ke bhich me jhagde hote rhete the or mera bada bhai jo mujse nafrat karta tha kyu wo kheta tha ki me apne papa ka beta nhi hun fir me jabh 12 saal ka hua to meri maa ne muje apne se alag nani me yha bhej diya me fir se apni naani maa ke pash rhene laga ek din jabh me 17 ka hua meri sabse pyari meri nani maa muje chod kar chali gai or me bhot akela hogya tha meri meri me ne kuje samala unone muje apne pas apne ghar par to nhi lekin muje dholpur me ek alag se ghar lekar muje bha rakha bas meri maa muje sam or shubh milne ati he or muje bhot pyar karti thi lekin mere dil me jo pyar meri nanai keliye thaw o koi nhi le sakta ha meri naani ke jane ke bad me bhot tut gya tha lekin meri maa ne wo kami dur kar diya maa ke sath kabh time gujar gya pata nhi chala or 18 saal ka hua tha tabh me ne dili padne chala gya or bha job bhi kart a rha or padai bhi karta rha he jabh me 22 saal kahua jabh achana ek rat aye ai jisne meri duniya badal diya 25 August 2012 ko rat ke 10.30 ka time ho rha tha me ek sab se acha dost tha jo mera bhai tha mere buaji ka ladka tha uska call aya or jabh usne mujse bo bat boli ki meri maa abh is duniya me nhi rhi me andar se itna tut chukka tha ki samjh me nhi arha tha ki me kya karun mene dobar mar ne ki Koch bhi ki lekin meri kismet jo muje marne nhi diya uske bad me hamesa keliye nashe me dub gya or andar andar hi apne apko marne laga fir meri life me ek ladki ai jisne muje gamse bhar nikala uska naam komal tha uske sath me ne 1saal gujara me apne gam ko bhul ne ki kosish hi kar rha tha ki ek din usne bhi akar mujse boldiya ki muje bhul jao me bapas bhi jha phele tha uske bad mene kabhi kisi ko apni life me ane nhi diya bas mera ek acha friend he jo mere sukh dukh me samil rha uska naam tanveer khan me jabhi kisi maa ko dekhta hun muje apni maa najar ati he aj me rat 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दोस्ती इन्सान की ज़रुरत है! दिलों पर दोस्ती की हुकुमत है! आपके प्यार की वजह से जिंदा हूँ! वरना खुदा को भी हमारी ज़रुरत है! ********************** हिन्दी शायरी: Hindi Shayari बरसात आये तो ज़मीन गीली न हो, धूप आये तो सरसों पीली न हो, ए दोस्त तूने यह कैसे सोच लिया कि, तेरी याद आये और पलकें गीली न हों। ********************** हिन्दी शायरी: Hindi Shayari यूँ नज़रें झुका कर मुस्कुराना ठीक नहीं दिल की बात दिल में दबाना ठीक नही हम तो मान चुके है दिल से दोस्त तुम्हें ये राज ज्यादा देर तक छुपाना ठीक नही ********************** हिन्दी शायरी: Hindi Shayari कहते है दिल की बात हर किसी को कही नहीं जाती अपनों को भी बताई नहीं जाती पर दोस्त तो ईन होते हैं और आईने से कोई बात चुप्पी नहीं जाती ********************** हिन्दी शायरी: Hindi Shayari कौन होता है दोस्त? दोस्त वो जो बिन बुलाये आये, बेवजह सर खाए, जेब खाली करवाए, कभी सताए, कभी रुलाये, मगर हमेशा साथ निभाए.. **********************

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Best Hindi ShayariDard Bhari Shayari in Hindi Font यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएं हम; न तमन्ना है कि किसी को रुलाएं हम; जिसको जितना याद करते हैं; उसे भी उतना याद आयें हम! ***************** Dard Bhari Shayari in Hindi Font दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं! तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं! यूँ तो मिल जाता है हर कोई! मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं! ***************** Dard Bhari Shayari in Hindi Font वो हर बार अगर रूप बदल कर न आया होता, धोका मैने न उस शख्स से यूँ खाया होता, रहता अगर याद कर तुझे लौट के आती ही नहीं, ज़िन्दगी फिर मैने तुझे यु न गवाया होता। ***************** Dard Bhari Shayari in Hindi Font Dil me na ho zarurat to mohabbat nahi milti Khairaat me itni badi daulat nahi milti Kuchh log yun hi shehr me hum se bhi khafa hain Har ek se apni bhi tabiyat nahi milti Dekha tha jise maine koi aur tha shayad. Wo kaun hai jis se teri soorat nahi milti Hanste hue chehro se hai baazar ki zeenat Rone ko yaha waise bhi fursat nahi milti ***************** Dard Bhari Shayari in Hindi Font Tum Rishta Bhulne Kaise Lage, Apne Gum Khushi Ko Chupane Kaise Lage, Hath Chodna Tha To Pahle Bol Dete, Aise Gum Naam Magrur Hone Kaise Lage… ***************** Dard Bhari Shayari in Hindi Font Pyar me koi to dil tod deta hai, Dosti me koi to bharosa tod deta hai, Zindagi jina to koi gulaab se sikhe, Jo khud toot kar do dilo ko jod deta hai…

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To usne kha ha shyad kuch jyada he,,,,pr vo is phele ko nhi samje,,or vha se chale gaye, Dhere dhere time neklta gya or vo ladka use trha use dakhta gya,,ab us ladke k mn me bhi uske leya kuch tha,,but kya vo nhi samj sake,,fir usne us ladke se friendship k leya ha kr de,,, Or shyad vo din uske leya bhut he khas tha,,fir us din k bad vo dono sath me time betane lage,,us ladke ki friends bhi us ladke ko bhut ache se jante the k vo bhut acha h,,,uske bat vo sb ak sath rhne lage,,vo ladka class me unse aage the,,,to unke pade me bhi help krta tha,, Isse trha fir us lagke ne exam deya,,and vo bhut ache no se pass ho gaye,,,isse bat pr vo us ladke k pass gaye or khushi me use bhut bhut thanks kha,, And fir vo 12th me aa gaye,,,fir us ladka n us college se dusre callege me addmisson le leya,,kyu k vo use class me age tha,,or vo college sirf 12th class tk he tha,, Vo bhut udas tha,but us ladke n samjaya k vo apna phone no de dege fir vo dono roj bat keya karege,, To vo larka bhi khus ho gya.,or fir vo roj bat krte the,,,or isse trha he hase majak me dono me pyar ho gya,,ak din us ladke ne puch he leya k tum mujse pyar karte ho,,,to us ladke n kuch nhi kha vo chup ho gaye,,bs itna tha k vo lagka khud smj gya k ye bhi muje pyar karte the,,,,, Vo ladke us ladke se kuch choti the or vo dunya k bare me itna jannte bhi nhi the,, Bs vo sb ko use trha jante the jis trha use mammy use batate the,,fir kuch dino bad ase he chalta rha vo isse me bhut khus the,,,,vo dodo pure pure rat msg krte the,,, Or ak pl bhi bat n hone pr machl se jte the,,ladke bhi use bhut chne lage the,,,uske leya kuch bhi krne ko tyar the,,,,jo vo collage jate to bs use ke bate karte,,,uske kuch friends k pass bhi uska no tha vo unsse bhi bate krte the,,,,but uske ak friend the jissne pure class me uska no de deya,,, Kuch khrab ladko k pass bhi uska no tha,,,vo roj usko pareshan karne lage,,msg call,,,,vo bhut pareshan ho gyae the,,usne us ladke ko bhi nhi btaya k koe call rhta h,,kyu k vo uska kisse se bhi bat krna pasand nhi krta the…bhut gussa krta tha,,,bhut dino tk ase he chlta rha,,or use tention bhi badte rhe,,or vo apne ghr me bhi btaye to kase,,,vo log use phone le late,,,,to isley usne kuch nhi btaya,,,, Pr ak din achank uska phone uske bhai ne utha leya..or usme un ladko k msg dakhe,,or uske bhai ne use phone le leya or use bhut data,,,, Fir uske mamey ne smjaya k ye sb theek nhi h,,…tum hamesha mare khan mannte to muje lgta h is bar bhi tum manoge…. Pr vo kya krte vo us ladke vo bhut chne lade the,,,,,pr usne yha apne pyar ka tyag dekr,,,apne mamey ki bat mane,,,,,usne ak sal tk us larke se bat nhi ki,,,,roj ase he trpte rhe uske leya but krte bhi kya,,,or use laga k shyad vo ladka use bhul jayga,,,but dil khta tha k vo aaj bhi usska wait kr rha h… Dhere dhere ase he sal gujr gya or vo use ase he yaad krte rhe,, Fir uske ak relation shadi aaye,,,,jisme use jana tha,,but uska dil nhi kr rha tha,,,uski mamey use bhut samjte the,,unko laga k vha jakr thoda mn theek ho jayga… Usko vha se uske mama lane aagaye or voc hale gaye,,, Vha vo thoda acha fell kr rhe the kyu k vha sb uske age ki he ladkeya the,, Vo dhekhve k leya bhut khus the but andr he andr uske leya mr rhe the,, Vha sb shadi ka mahol tha,, hase majak chal rhe the,,,but vo akele room me bathe the,,,vha bhut sare mhman aaye or sbhe he mste kr rhe the,,,fir vha ak ladka aaya job s use ko dakh rha tha,,but vo use ignor kr rhe the,,,vo ladka use bhut bat krna chat tha,,,but use ase moka he nhi mela,,, Bs kuch he time tha usko apne ghr vaps aane me,,tbhe us ladke n aapme family se kha k vo us ladke ko chat h,,or vo bhi use pasand krte h.. Vo us ladke se bada tha,,but education me km,, isley us ladke ki mamey man bhi jate but isley he nhi manne… or fir shade ka mahol khatm ho gya…sb apne ghr ko janne lage,,but us ldke ne us ladke ko badnam kr deya k us ladke ne use propos keya tha…. Us ladke ko kuch pta n tha,,,bad me uske mamey ne pucha kyat um bhi use chte ho.. Usne pucha kisse.. Mamey ne pucha kyat um use nhi jannte jo kr rha tha k tum bhi use,,,,,?? Usne kha me use nhi,,,,jaante,,,,,,,,, Or us time vo akele me bhut roye,,,,use fir se usske bhut yaad aane lage vo bs ak bar uske aavaj sunna chte the,,,, Isse tention me vo jete rhe,,, But ak bar usne apne mammy ki bat ko bhul kr us ladke ko call keya,,,or phone pr kuch bole bina he rone lage,,isna sunne pr vo ladka use phchan gya,or use samjane lga,, or fir us ladke ne use sb btya k usne ye sb apne mamey k leya keya,,..ladka man gya or bola koe bat nhi,,,,but kyat um jante ho k me kase tdpa he tumhare leya ………..usne rote hue kha,,,yhe mara halt tha,,, Fir us din k bad vo fir se bat krne lage…..bs vo bat he krte the,kabhi ak dure se nhi mil pate the,, Fir achank us ladke ko kuch deno k lya uske mamy me bhut dur bhaj deya..or vo use bta bhi nhi paye,,, Fir se vhe sb hone lga,,,,un dono ko fir se alg kr deya,,,,,vo ladke bs rote rhte the…krte bhi to kya,,, Ak din achank college me exam time vo ldka uske smne aa gya… Vo ak dm shok ho gaye,,or thode dar usko he dakhte rhe,, Uske aakho me aasu,,or jban pr kuch tha,,jo vo use khan chte the,,but vo ladka uske bina kuch khe sb smj jata tha,, Aakho se aasu girne se phle usne unhe phuc deya,,,or bolo ro nhi rone se kuch nhi hota,,, Sbr karo sb theek ho gayega,, Or fir vo dodo college k park me kafe dar bate krte rhe,, Ab vo ladke use kafi dur the,,,shr me bhi uske dost banne lage,,but vo use ko chte the, Pr dhere dhere dono me lade hone lage,,, Vo sochta tha k vo sb ko jyada time date h,,,or mujse bat bhi nhi krte,,but vo krte bhi kya use pass koe bhi phone nhi tha,,,,,or vo bs apne pass k friends se bat krte the,,but usne us ladke k bare me kise ko bhi kuch nhi btaya,,,, Vo ladka us pr bhut shak krne laga,,,hr bat pr bolta k tum rho unhe k sath,,,vo ladke bs rokr he rh jate the,,,dhere dhere unme dureya bhadne lage, Fir ak din uske mamey ko pta chala k vo fir se us ladke se bat krte h,,,mamey ne use kasm de k tum agr apne family ko chte ho to use bat nhi karoge,,, Use smj nhi aa rha tha k vo kya kare,,, But vo us ladke ko bhut pyar krte the,,,,, Usne apne mamey ki ksm ko bhul kr fir se use bat ki,,,hamesha apne mamey ko jhut bolte rhe… Pr un dono me pyar nhi duriya bhad rhe the,,, Vo ladka ab uske phone ko bhi chek krne laga k ye kis se bat krte h,, Us ladke ka drd itna bhad gya k usne ak fasla keya k vo ab apne family k leya he jeyege,,,use pyar k nam se nafrt hone lage, jiss ladke k leya use itna kuch sha fir bhi use nhi lagta k vo use pyar krte h,,usne apne family ko itna heat keya.. Usne ab use bat n krna ka fasla kr leya,,,,,, Pr vo use nhi bhula pa rhe the,,,,, Time neklta rha or fir agla sal ho gya,, Us ladke k bhut se friends bhi banne,, vo use shr me teaching krne lage,,, Usley k uska mn theek rhega students k bechme,,, Or fir ak din vo ak ladke se mele,,,, Dono ne aaps me bat ki or friendship ho gaye,,,vo dono fb friends bhi bn gye, Vo ladka bhut acha tha vo bhi shyad use chne laga tha,,,but vo ladki pyar se nafrt krne lage the,,, Vo dono aaps me chat krne lage ,,,ase he hase majk me us ladke ne pucha k tumhare koe gf h,,to usne khan hi,, Or fir us ladka ne bhi yhe saval keya,,,,to use ladke ne mna kr deya,,,ladka ne pucha kyu,,to usne kha hr kyu ka javab nhi hota,, Ladka ko pta tha k ye kuch chupra rhe h..or muje shere nhi rhna chte,,, Fir bhi usne ignor kya,, Dhere dhere dono ki friendshio bhut bad gaye,,dono phone se bhi bat krne lage,, Us ladka ne sb kuch jante hue bhi us ladke se pyar krna laga,,shyad kuch use bhi fel hota tha,,,but vo ignor kr rhe the,,,, Us ladke ne kabhi use propose nhi keya but vo uska bhut khyal rakhta h,,uska hr ak gm me sath rhta tha,,, Us hr ak aasu usko rula deta tha,,,,, Dhere dhere vo dono ak dure ko chne lage,,,, Or us ladke ne use apna leya,, Vo us bat se khus the k ye ladka mujse sucha pyar krta h,,,sb kuch jannte hue bhi,, k usne phle kise or ko chha tha,, Vo dono ak dusre k sath bhut khus the,,,,us ladke ne uske life me isne khusya bhr de k vo bhul he gyae k kabhi vo roye bhi the,,,,, But kuch din bad vo ladka uske life me vaps aa gya…vo roj uske phone pr call rhne lga,,, Vo usse bhut naft krte the,,,or khe jyada ab is ldke se pyar,,.. Pr vo ab kya kare,,,smj he nhi aa rha tha,,,,,uske aane se uske ladke ki life bekar ho gaye,, ,,,,,,,,,,, Vo kare to kya kare…………??????????????????? Plzzzzzzzz give me ans…… Is ladke ko kya krna cheya,,,,,, Jo bhi javab h,,,,khul k bto…plzzzzzzzzzzz……

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दो बूढ़े आदमी काफी सालों से अच्छे दोस्त थे दोनों की उम्र अब लगभग 90 वर्ष के आसपास होगी! एक दिन उनमें से एक दोस्त बहुत बीमार हो गया उसका दूसरा दोस्त उसे रोज मिलने के लिए आता था और रोज वे अपने दोस्ती के किस्से दोहराते थे! उन्हें लगभग अब यकीन हो चला था कि जो बीमार था वह चंद दिनों का ही मेहमान है! एक दिन उसके बूढ़े दोस्त ने बिस्तर पर पड़े अपने दोस्त से कहा, देखो जब तुम मर जाओगे, मेरे लिए एक काम जरुर करना! बिस्तर पर पड़े दोस्त ने पूछा, कौन सा काम? तुम मरने के बाद स्वर्ग में क्रिकेट खेलतें है या नहीं खेलते इसके बारे में मुझे जरुर बताओगे! दोनों ही क्रिकेट के बहुत दिवाने थे. क्यों नही! जरुर बिस्तर पर पड़े दोस्त ने कहा! और एक दो दिन में ही बीमार पड़ा दोस्त भगवान को प्यारा हो गया! कुछ दिन बाद जो जिंदा बूढ़ा दोस्त था उसे नींद में अपने मरे हुए दोस्त की आवाज सुनाई दी! ”तुम्हारे लिए मेरे पास दो खबरें है…एक बुरी और एक अच्छी …” दोस्त्: अच्छा तो सुनाओ क्या है खबर मेरे लिए. पहले अच्छी खबर बताना भाई. मरा हुआ दोस्त: अच्छी खबर यह है कि स्वर्ग में क्रिकेट खेलतें है! र उसने सपने में ही बड़बड़ाते हुए पूछ लिया और बुरी खबर? दूसरे दोस्त ने कहा बुरी खबर यह है कि तुम्हें आने वाले बृहस्पतिवार के मैच में बोलिंग करनी है!:) देखा दोस्तों दोस्ती मरने के बाद भी दोस्ती ही रहती है. पसंद आई तो अवश्य कमेंट करें .

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१. जिस व्यक्ति का चरित्र उत्तम है उसकी संगती भले ही कैसी भी हो उसका कुछ नही बिगड़ सकती, जिस प्रकार चन्दन के वृक्ष पर लिपटे सर्प कभी चन्दन को विषैला नही कर सकते २. जब मैंने किसी बुरे की तलाश करनी चाही तो मुझे कोई भी बुरा नही मिला,मगर जब मैंने अपने ही ह्रदय में झाँक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई भी नज़र नही आया ३. रहीम जी कहते हैं की प्रेम से भरा रिश्ता कभी किसी छोटी सी बात पर बिना सोचे समझे नही तोड़ देना चाहिए, क्युकी ये एक धागे के समान होते हैं जो जुड़ तो जाते हैं मगर गाँठ फिर भी पड़ी रहती है ४. यदि कोई व्यक्ति बड़ा आदमी बन जाये तो इसे बड़े आदमी का कोई मोल नही होता,जब तक की वो किसी की सहायता करने योग्य न हो, जिस प्रकार खाजूर का वृक्ष होता तो बड़ा है परन्तु न तो उससे किसी राही को छाया मिलती है और न ही किसी को फल ५. सभी से प्रेम से बातें करनी चाहिए, विश्व में बस एक ही मंत्र है जिससे लोगो को अपने वश में किया जा सकता है और वो है अपने कडवे वचनों का त्याग

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१. जिस व्यक्ति का चरित्र उत्तम है उसकी संगती भले ही कैसी भी हो उसका कुछ नही बिगड़ सकती, जिस प्रकार चन्दन के वृक्ष पर लिपटे सर्प कभी चन्दन को विषैला नही कर सकते २. जब मैंने किसी बुरे की तलाश करनी चाही तो मुझे कोई भी बुरा नही मिला,मगर जब मैंने अपने ही ह्रदय में झाँक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई भी नज़र नही आया ३. रहीम जी कहते हैं की प्रेम से भरा रिश्ता कभी किसी छोटी सी बात पर बिना सोचे समझे नही तोड़ देना चाहिए, क्युकी ये एक धागे के समान होते हैं जो जुड़ तो जाते हैं मगर गाँठ फिर भी पड़ी रहती है ४. सभी से प्रेम से बातें करनी चाहिए, विश्व में बस एक ही मंत्र है जिससे लोगो को अपने वश में किया जा सकता है और वो है अपने कडवे वचनों का त्याग

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रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe पोस्टेड ओन: 30 Jun, 2012 जनरल डब्बा में Rss Feed SocialTwist Tell-a-Friend रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe आप सभी लोगों ने यूं तो मेरी कई रचनाओं को बहुत पढ़ा है लेकिन जिस तरह से आप पाठकों ने रहीम के दोहे पढ़े उसे द्केह में आश्चर्यचकित हूं. मेरे औसत ब्लॉग जो 100-200 रीडिंग करने में मर जाते हैं वहीं अगर रहीम जी का नाम आए तो यह आकंडा जादुई बन जाता है. इस बात को समझते हुए कि आज की जीवनशैली में भी कई लोग रहीम और कबीर के दोहों को पढ़ना पसंद करते हैं. मैं आप लोगों के लिए कुछ बेहतरीन दोहे अर्थ सहित लेकर आया हूं. रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe अनुचित वचन न मानिए, जदपि गुराइस गाढ़ि। है ‘रहीम’ रघुनाथ तें, सुजस भरत को बाढ़ि।। अर्थ : ‘‘कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हों उसकी गलत बात नहीं मानिए भले ही वह कितनी भी महत्वपूर्ण क्यों न हो। भगवान श्री राम ने अपने पिता की बात मानते हुए वनगमन किया पर फिर भी उनसे अधिक यश उस भरत को प्राप्त हुआ जिन्होंने मां की आज्ञा ठुकराकर राज्य त्याग दिया।’’ रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe ‘‘अब ‘रहीम’ मुश्किल बढ़ी, गाढ़े दोऊ काम। सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम।। अर्थ: ‘‘दुनियां में दो महत्वपूर्ण काम एकसाथ करना अत्यंत कठिन है। सच का साथ लो तो जग नहीं मिलता और झूठ बोलो तो परमात्मा से साक्षात्कार नहीं हो पाता। रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe जसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह धरती पर ही परत है, शीत घाम और मेह कविवर रहीम कहते हैं कि इस मानव काया पर किसी परिस्थिति आती है वैसा ही वह सहन भी करती है। इस धरती पर ही सर्दी, गर्मी और वर्षा ऋतु आती है और वह सहन करती है। रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं, यह रहीम जग होय मंड़ए तर की गाँठ में, गाँठ गाँठ रस होय कविवर रहीम कहते हैं कि यह संसार खोजकर देख लिया है, जहाँ परस्पर ईर्ष्या आदि की गाँठ है, वहाँ आनंद नहीं है. महुए के पेड़ की प्रत्येक गाँठ में रस ही रस होता है क्योंकि वे परस्पर जुडी होतीं हैं. रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe 6. जलहिं मिले रहीम ज्यों, कियो आपु सम छीर अंगवहि आपुहि आप त्यों, सकल आंच की भीर कविवर रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार जल दूध में मिलकर दूध बन जाता है, उसी प्रकार जीव का शरीर अग्नि में मिलकर अग्नि हो जाता है. रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe 7. फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम में कभी भी टेढ़ी चाल नहीं चली जाती। जिस तरह शतरंज के खेल में पैदल सीधी चलकर वजीर बन जाता है वैसे ही अगर किसी व्यक्ति से सीधा और सरल व्यवहार किया जाये तो उसका दिल जीता जा सकता है। रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke dohe 8. प्रेम पंथ ऐसी कठिन, सब कोउ निबहत नाहिं रहिमन मैन-तुरगि बढि, चलियो पावक माहिं कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम का मार्ग ऐसा दुर्गम हे कि सब लोग इस पर नहीं चल सकते। इसमें वासना के घोड़े पर सवाल होकर आग के बीच से गुजरना होता है। Rate this Article: 1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (14 votes, average: 3.36 out of 5) 2 प्रतिक्रिया SocialTwist Tell-a-Friend Similar articles : रहीम के दोहे अर्थ सहित: rahim ke Dohe with meaning: तुम मेरा पीठ खुजाओ, मैं तेरा पीठ खुजाता हूँ ! Kabir ke dohe: कबीर के दोहे हिन्दी में अर्थ सहित पत्नी और पत्नी का शक: हास्य व्यंग्य Santa Banta jokes: संता-बंता चुटकुले (हास्य व्यंग्य) कुछ हिन्दी दर्द भरी शायरियां भाग 1(Shayari In Hindi) गर्लफ्रेंड्स के नखरे एक रेपिस्ट का पत्र Chutkule : प्रेमी प्रेमिका और जरा सी मस्ती का कॉकटेल प्यार के नाम : Hindi Shayri Previous | Next Post a Comment नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments jlsingh के द्वारा July 1, 2012 ऐसी ही प्रस्तुति की आशा में … narayani के द्वारा June 30, 2012 नमस्कार आपके द्वारा रहीम के दोहे प्रस्तुत किये जाने पर अच्छा लगा कबीर, रहीम सबके छोटे से संदेश जीवन के लिए बड़े उपदेश देते है. धन्यवाद   like this.................. सागर रॆकवार

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प्रिय जैक भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपने अपने इस प्रयास द्वारा मुझको बिन मोल खरीद लिया है .... इस मंच पर हमारी पहली मुलाकात पर मैंने जो शेयर लिखा था उसको तोड़ मरोड़ कर पेश करना चाहूँगा :- "वोह खुद को जैक और हमको जिल कहते है अब तो एंग्री भी नहीं करते फिर भी जस्ट चिल कहते है" जिस प्रकार आपने मेरे लिए यह स्पेशल पोस्ट लिखी है बिलकुल उसी तरह ही मैंने भी हमारी दोस्ती के नाम पर यह स्पेशल कमेन्ट लिखा है ... क्योंकि आज मैं सिर्फ आपके लिए ही इस मंच पर हाजिर हुआ हूँ और शायद इस मंच पर यह मेरे आखिरी शब्द साबित हो , अगर कोई चमत्कार नहीं हो जाए तो .... अपना खुद का एक पुराना मजाकिया शेयर कहता हूँ - "हम बरसो से याद करते है तुम बरसो में याद करते हो भूले से याद करते हो याद करके फिर से भूल जाते हो" इस फ्रेंडशिप दे पर आपको और पने सभी साथियों का शुभ चाहता हूँ और जीवन के हरेक क्षेत्र में सफलता की कामना करता हूँ हार्दिक आभारी हूँ आपका

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

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श्रीमान जी प्रथम दोहे का अर्थ है : १) रहीम जी कहते है जो मनुष्य अछे आचरण के होते है उनके आचरण मैं गलत संगत का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जैसे की चन्दन के पेड पर अजगर लिपटने से चन्दन के लकड़ी मैं विष नहीं मिलता है २) रहीम जी कहते है दुसरो के अन्दर बुराइया खोजने से अछा आप अपना ह्रदय मैं झांक के देखेंगे तोह आप को लगेगा के आप से बुरा कोई नहीं है इसलिए दुसरो मैं बुराइया खोजने से अछा है आप अपना ह्रदय निर्मल रखें है ३) रहीम जी कहते है की प्रेम का जो रिश्ता होता है वो कचे धागे की तरह होता है अगर कचे धागे जरा सा भी झटका लगता है वो टूट जाता है और अगर आप उस धागे को जोड़ने की कोशिस करते है तो उसमे एक जोड़ बनजाती वैसे ही प्रेम का रिश्ता भी है जब कोई तकरार प्रेम मैं अत है रिश्ता टूट जाता है और बाद मैं आप लाख उसे जोड़ने की कोसिस करे मगर एक कसक सी रहजाती है ४) रहीम जी कहते है जैसे खजूर का पेड सीधा और बड़ा होजाता है न तो वो रह्में चलने वाले पंथे को छाया भी नहीं दे पाता है और फल भी इतने उपर की कोई उसे तोड़ के खा सके इसका अर्थ है आप चाहे लाख बड़े हो जाये और किसी के कम न ए तोह आप का बड़ा होना और जीवन व्यर्थ है ५)रहीम जी कहते है कठोर वाणी को त्याग कर मीठे वचन बोले क्यूँ की मीठा वचन की ही चारो ओर प्रेम फैलाता है और किसी को अपने वश मैं करना है तो उसे दो मीठे बोल बोले वो आप से मोहित हो जायेगा अगर मुझसे कोई त्रुटी हुई हो तोह उसके लिए मैं छमा चाहूँगा धन्यवाद्

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के द्वारा: abhii abhii

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के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

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प्रथम पंक्ति में रहीम दास जी कहते है कि उच्च विचार वालो से बुरी सांगत वाले जुड़े रहते है जिस प्रकार चन्दन के पेड़ से सर्प लिपटे रहते है जब बुराई को देखने के लिए निकला तो मुझे बुरा कोई न दिखा तो जब मैंने अपने अन्दर झांकर देखा तो पता चला कि मुझे से बुरा कोई नहीं है सब से बुरा में ही हू रहीम दास जी कहते है कि प्रेम के बंधन को कभी तोड़ना नहीं चाहिए क्योकि प्रेम के बंधन में एक बार जब गांठ पद जाती है तो वह हमेशा बनी रहती है जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाता है तो वह जुड़ता नहीं है अगर वह जुड़ भी जाता है है तो उसमे गांठ तो बनी ही रहती है बड़ा होने से कोई फायदा नहीं है बिना गुण के जिस प्रकार खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है पर छाया नहीं देता है और न ही फल देता है बस वो देखने में बड़ा होता है यदि हम सबसे मीठा बोलेंगे तो हमको चारो तरफ प्यार मिलेगा इसका मतलब यह है किजैसा करोगे बैसा भरोगे

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के द्वारा: jack jack

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आपने सच को आइना दिखाया है,वो सच जो सच में बहुत शर्मनाक है,प्रेम अश्लीलता की दलील नहीं देता,लेकिन अँधा प्यार,जिसमे तमाम अभिव्यक्तियों का माध्यम सिर्फ शरीर ही बन जाता है,एक जरुरत होती है,इसे प्यार कहना शर्मनाक होगा.और इन बेगैरत 'प्रेमी-जोड़ों' की वजह से आज संस्कृत लोगों का पार्क में जाना एक प्रताड़ना झेलने जैसा हो गया है,उद्यान भ्रमण के लिए हैं,जहां सभी प्रकृति के सान्निध्य का अनुभव कर सकें,लेकिन वहाँ पर प्रेमी-जोड़ों का आलिंगनबद्ध पाया जाना सांस्कृतिक आतंकवाद है.यह गिरते नैतिक स्तर का प्रतीक है,आपने इसकी सुधि ली,इसके लिए मैं आपको साधुवाद देता हूँ,आपको सार्थक लेखन की बधाइयाँ देता हूँ.

के द्वारा: rahulpriyadarshi rahulpriyadarshi

अन्ना जी ने भ्रस्टाचार के खिलाफ ये जन आन्दोलन किसलिए छेड़ा है ? ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी ,जिनके भविष्य को सवारने के लिए हम सभी दिन रात कर्यरत रहते है , उनके लिए ताकि वे आने वाले समय में खुली हवा में स्वाश ले सके, आज स्तिथि ये तो हो चुकी है कि भ्रस्टाचार हम सभी को गले तक निगल चुकी है और यदि ये जन लोकपाल बिल पारित नहीं हुआ तो यह निश्चित है कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए जिंदगी जी पाना बेहद दुष्कर हो जायेगा और यदि जन लोकपाल बिल लागू हो जाता है तब हम पूरी तरह से न सही परन्तु गले तक आ चुके पानी हमारी कमर के निचे चला जायेगा जिससे हमारे लिए और हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए जिंदगी जीना असं हो जायेगा . जय हिंद

के द्वारा: Suraj Agrawal Suraj Agrawal

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