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गालिब की शायरी और गजलें

Posted On: 11 Feb, 2011 Others,Entertainment में

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इश्क का सप्ताह शुरु हो गया है और जागरण जंक्शन पर तो जैसे इश्क का भूत सवार हो गया है. लोगों को प्यार के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा. हमने सोचा हम भी प्यार की आग बढ़ाएंगे और सबको दिखा देंगे कि ओल्ड इज गोल्ड होता है. समझे कि नहीं समझे. हम किसलिए है फिर. देखिए प्यार की नई-नई परिभाषाएं तो सब दे रहे हैं लेकिन कई सालों पहले मिर्ज़ा गालिब ने भी प्यार की राह में चंद शेर लिखे थे जो वाकई प्रेम-रस में सराबोर थे. आप भी आज मजा लीजिए इन शायरी और गजलों का:


रोने से और इश्क़ में बेबाक हो गए

धोए गए हम ऐसे कि बस पाक हो गए ॥


Read: मैं जिससे प्यार करता हूं…


सर्फ़-ए-बहा-ए-मै हुए आलात-ए-मैकशी

थे ये ही दो हिसाब सो यों पाक हो गए ॥


रुसवा-ए-दहर गो हुए आवार्गी से तुम

बारे तबीयतों के तो चालाक हो गए ॥


कहता है कौन नाला-ए-बुलबुल को बेअसर

पर्दे में गुल के लाख जिगर चाक हो गए ॥


पूछे है क्या वजूद-ओ-अदम अहल-ए-शौक़ का

आप अपनी आग से ख़स-ओ-ख़ाशाक हो गए ॥


करने गये थे उस से तग़ाफ़ुल का हम गिला

की एक् ही निगाह कि बस ख़ाक हो गए ॥


इस रंग से उठाई कल उस ने ‘असद’ की नाश

दुश्मन भी जिस को देख के ग़मनाक हो गए ॥


वैसे यह तो गालिब की शायरी का एक पहलू है और अगर इसका नया वर्जन देखना है तो वीडियो देखिए. नए वर्जन से मतलब है गालिब की गजलों की रीमिक्स.. देखिए और मजा लीजिए.


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583 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Elouise के द्वारा
June 9, 2016

Smart thiiknng – a clever way of looking at it.

    Reggie के द्वारा
    June 11, 2016

    64-64 El Camino, VW Rabbit, pre 74 Ford Mavkrice, 76ish Aspen or Volare, about 66 Chevy pick-up, 66 Ford cut off in lower correct corner. 77-78 Dodge Diplomat driving out of still left body.

Joeie के द्वारा
June 1, 2011

I’m not wrtohy to be in the same forum. ROTFL

    Hayle के द्वारा
    June 9, 2016

    Marie, you are so inblrdicey sweet. I just read this and I am so sorry for your loss. What you and Shelly are doing for us leaves me without words to express how I feel. I will be praying for you on your journey as well. God bless!

Bhagwan Babu के द्वारा
February 11, 2011

ग़ालिब के तो क्या कहने – हज़ारो ख्वाहिशे ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमां फिर भी कम निकले

    Hester के द्वारा
    June 1, 2011

    You have shed a ray of sunshine into the forum. Thkans!

R K KHURANA के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय जैक जी, ग़ालिब की शायरी के बार में तो कुछ कहने की जरुरत ही नहीं ! आप रिमिक्स भी बहुत सुंदर है आर के खुराना

    Solyn के द्वारा
    June 1, 2011

    That’s 2 celevr by half and 2×2 clever 4 me. Thanks!


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