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थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )

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हिन्दी शायरी – प्यार की मस्ती में

Posted On: 17 Feb, 2011 जनरल डब्बा में

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heart_broken_in_two

जी ढूंढ़ता है घर कोई दोनों जहां से दूर
इस आपकी जमीं से अलग, आसमां से दूर

*********************

आती है किस तरह से मेरी कब्ज-ए-रूह को
देखूं तो मौत ढूंढ़ रही है बहाना क्या

*********************

pink-heart-love--

सरे महशर यही पूछूंगा खुदा से पहले
तूने रोका भी था मुजरिम को खता से पहले

*********************

न मेरे जख्म खिले हैं न तेरा रंग-ए-हिना
मौसम आए ही नहीं अब के गुलाबों वाले

*********************

ये शबे फिराक ये बेबसी, हैं कदम-कदम पे उदासियां
मेरा साथ कोई न दे सका, मेरी हसरतें हैं धुआं-धुआ

*********************

हमको तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया
रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया

*********************

हर शम्आ बुझी रफ्ता रफ्ता हर ख्वाब लुटा धीरे – धीरे
शीशा न सही पत्थर भी न था दिल टूट गया धीरे – धीरे

*********************

अय मौत, उन्हें भुलाए जमाने गुजर गए
आजा कि जहर खाए जमाने गुजर गए



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iseujpzrhp के द्वारा
June 2, 2011

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June 1, 2011

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June 1, 2011

Great thinking! That rlaley breaks the mold!

R K KHURANA के द्वारा
February 17, 2011

प्रिय जैक जी, ये शबे फिराक ये बेबसी, हैं कदम-कदम पे उदासियां मेरा साथ कोई न दे सका, मेरी हसरतें हैं धुआं-धुआ अच्छी कविता ! आर के खुराना




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