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थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )

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रहीम के दोहे – Rahim ke Dohe

पोस्टेड ओन: 25 Feb, 2011 जनरल डब्बा में

rahim1

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग ।

चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।।1 ॥


बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसा बुरा न कोय ॥2 ॥


रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय ॥3 ॥


बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ॥4 ॥


मीठा सब से बोलिए, फैले सुख चहुँ ओरे!

वाशिकर्ण है मंत्र येही, ताज दे वचन कठोर ॥5 ॥


अब इन पांचों दोहों का मतलब कोई दोस्त बता दे, आज देखते है जागरण जंक्शन के दोस्तों में कुछ ज्ञान है या बस…. राजकमल जी, निखिल जी और आदरणीय खुराना जी से विशेष आग्रह है कि जरा इन दोहों का अर्थ बता दें क्यूंकि ये हिन्दी में तो मुझे कहीं नहीं मिले.



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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satyam के द्वारा
October 27, 2014

MAST HAI……………………………………………………………………………………………………………………..

satyam के द्वारा
October 27, 2014

ई आम नोट सतिसफ़िएड विथ योर आंसर.

satyam के द्वारा
October 27, 2014

thanks for your help!!!

Shashikant के द्वारा
December 13, 2013

हमें सभी लोगो से प्रेम से बातें करनी चाहिए,क्युकी सारे संसार में बस यही एक मंत्र है जिससे लोगो को अपने वश में किया जा सकता है और वो है अपने कडवे वचनों का त्याग करके .

Shashikant के द्वारा
December 13, 2013

यदि कोई व्यक्ति बड़ा आदमी बन जाये तो इसे बड़े आदमी का कोई मोल नही होता,जब तक की वो किसी की सहायता करने योग्य न हो, जिस प्रकार खाजूर का वृक्ष होता तो बड़ा है परन्तु वह इतना बड़ा होता है कि न तो उससे किसी राही को छाया मिलती है और अत्यधिक ऊँचा होने के कारन ही वह किसी को फल भी नहीं दे पाता.

Shashikant के द्वारा
December 13, 2013

Third dohe me kabir daas ji kahte hai ki ” He manav kisi bhi pyar bhare rishte ko hume bina soche samjhe nahi todna chahiye yani ki hume kishi bhi rishte ko todane se pahle( kishi ke sath bura baartav karne se pahle) hajar baar soch lena chahiye kyuki koi bhi rishta tutne ke baad fir doobara nahi joda ja sakta hai aur agar jod bhi diya jay to jaise tooti huyi rassi jodane par gath pad jati wase hi tuta rista jodne par pahle jaisi baat nahi rah jati hai

Shashikant के द्वारा
December 13, 2013

Second dohe me kabir daas ji kahte hai ki ” Maine Duniya me Bure logo ko bahut khoja par mujhe aajtak koi bhi bura aadami nahi mila. Fir maine apne aap me hi boorai khojne ki sochi to maine paya ki sare jaha me mujhase bura koi nahi hai. Kabir daas ji ka kahne ka arth yah hai ki hum doosare logo me bahut booriya dekhate(Nikalate) hai par apne andar kabhi jhank kar nahi dekhate hai kayuki sari booraiya humare ander hi samahit hoti hai.

Shashikant के द्वारा
December 13, 2013

First dohe me kabir daas ji kahte hai ki ” Jo acche swbhav ka sajjan aadmi hota hai use hum kitne hi bure logo ke sath rakhe par waha par bhi wah sajjano ki tarah hi vyawhar karega jaise ki chandn ke ped par hajaro Lakho vishaile sharp raat din lipte hote hai phir bhi vah hamesha sheetal aur sugndhit bana rahta hai” Usi prakar Hum kitani bhi buri paristhiti me ho hume apna (Dhourya Nahi Khona Chahiye) acharan Pavitra aur Suddh rakhana Chahiye.

Daljit Singh के द्वारा
September 10, 2013

पहले दोहे में रहीम जी संतो को कहते है की ” हे संत्जन्नो जैसे चन्दन वृक्ष पर हजारो सांप लिपटने पर भी विषैला नहीं होता, ढीक वैसे ही प्रभु की भागती में लीन पुरुष उन की किरपा द्वारा हजारो दुराचारीयो के बीच रहकर भी कोमल और निर्मल बना रहता है” इसलिए आप चिंता मत करे प्रभु आप पर किरपा करेंगे.

bidu ladki के द्वारा
July 21, 2013

this is not the right answer…,

Sudhanshu के द्वारा
April 18, 2013

१. जिस व्यक्ति का चरित्र उत्तम है उसकी संगती भले ही कैसी भी हो उसका कुछ नही बिगड़ सकती, जिस प्रकार चन्दन के वृक्ष पर लिपटे सर्प कभी चन्दन को विषैला नही कर सकते २. जब मैंने किसी बुरे की तलाश करनी चाही तो मुझे कोई भी बुरा नही मिला,मगर जब मैंने अपने ही ह्रदय में झाँक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई भी नज़र नही आया ३. रहीम जी कहते हैं की प्रेम से भरा रिश्ता कभी किसी छोटी सी बात पर बिना सोचे समझे नही तोड़ देना चाहिए, क्युकी ये एक धागे के समान होते हैं जो जुड़ तो जाते हैं मगर गाँठ फिर भी पड़ी रहती है ४. यदि कोई व्यक्ति बड़ा आदमी बन जाये तो इसे बड़े आदमी का कोई मोल नही होता,जब तक की वो किसी की सहायता करने योग्य न हो, जिस प्रकार खाजूर का वृक्ष होता तो बड़ा है परन्तु न तो उससे किसी राही को छाया मिलती है और न ही किसी को फल ५. सभी से प्रेम से बातें करनी चाहिए, विश्व में बस एक ही मंत्र है जिससे लोगो को अपने वश में किया जा सकता है और वो है अपने कडवे वचनों का त्याग

Sudhanshu के द्वारा
April 18, 2013

१. जिस व्यक्ति का चरित्र उत्तम है उसकी संगती भले ही कैसी भी हो उसका कुछ नही बिगड़ सकती, जिस प्रकार चन्दन के वृक्ष पर लिपटे सर्प कभी चन्दन को विषैला नही कर सकते २. जब मैंने किसी बुरे की तलाश करनी चाही तो मुझे कोई भी बुरा नही मिला,मगर जब मैंने अपने ही ह्रदय में झाँक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई भी नज़र नही आया ३. रहीम जी कहते हैं की प्रेम से भरा रिश्ता कभी किसी छोटी सी बात पर बिना सोचे समझे नही तोड़ देना चाहिए, क्युकी ये एक धागे के समान होते हैं जो जुड़ तो जाते हैं मगर गाँठ फिर भी पड़ी रहती है ४. सभी से प्रेम से बातें करनी चाहिए, विश्व में बस एक ही मंत्र है जिससे लोगो को अपने वश में किया जा सकता है और वो है अपने कडवे वचनों का त्याग

Raj jadhav के द्वारा
January 16, 2013

Bohat acha hai

xyz के द्वारा
January 9, 2013

बड़े अच्छे लगते हैं ये दोहे रहीम और उसके शब्द ला ला ला ला ला ला ………………

VAISHNAVI GUPTA के द्वारा
December 23, 2012

rahimdas ji k dohe achche hote han………….!! :)

    jack के द्वारा
    January 11, 2013

    दोहे जीवन का सार होते है.. और जीवन हमेशा अच्छा होता है.. KEEP VISITNG http://www.jack.jagranjunction.com

gaurav के द्वारा
October 15, 2012

मस्त हैं ! :)

jdf.vjn के द्वारा
May 31, 2012

RADDDD BEKARRRRRRR

Angana Borah के द्वारा
May 24, 2012

बड़े अच्छे दोहे है. इनको पढकर मन प्रसन्न हो जाता है.

Tahnee के द्वारा
May 7, 2012

रहीम जी के दोहे यहाँ पोस्ट करने के लिए बहुत धन्यवाद, इसके बिना मेरा गृहकार्य पूरा ही नहीं हुआ होता :)

    sachit के द्वारा
    June 8, 2012

    i love u tanhee

कुलदीप श्रीवास्तव के द्वारा
May 4, 2012

श्रीमान जी प्रथम दोहे का अर्थ है : १) रहीम जी कहते है जो मनुष्य अछे आचरण के होते है उनके आचरण मैं गलत संगत का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जैसे की चन्दन के पेड पर अजगर लिपटने से चन्दन के लकड़ी मैं विष नहीं मिलता है २) रहीम जी कहते है दुसरो के अन्दर बुराइया खोजने से अछा आप अपना ह्रदय मैं झांक के देखेंगे तोह आप को लगेगा के आप से बुरा कोई नहीं है इसलिए दुसरो मैं बुराइया खोजने से अछा है आप अपना ह्रदय निर्मल रखें है ३) रहीम जी कहते है की प्रेम का जो रिश्ता होता है वो कचे धागे की तरह होता है अगर कचे धागे जरा सा भी झटका लगता है वो टूट जाता है और अगर आप उस धागे को जोड़ने की कोशिस करते है तो उसमे एक जोड़ बनजाती वैसे ही प्रेम का रिश्ता भी है जब कोई तकरार प्रेम मैं अत है रिश्ता टूट जाता है और बाद मैं आप लाख उसे जोड़ने की कोसिस करे मगर एक कसक सी रहजाती है ४) रहीम जी कहते है जैसे खजूर का पेड सीधा और बड़ा होजाता है न तो वो रह्में चलने वाले पंथे को छाया भी नहीं दे पाता है और फल भी इतने उपर की कोई उसे तोड़ के खा सके इसका अर्थ है आप चाहे लाख बड़े हो जाये और किसी के कम न ए तोह आप का बड़ा होना और जीवन व्यर्थ है ५)रहीम जी कहते है कठोर वाणी को त्याग कर मीठे वचन बोले क्यूँ की मीठा वचन की ही चारो ओर प्रेम फैलाता है और किसी को अपने वश मैं करना है तो उसे दो मीठे बोल बोले वो आप से मोहित हो जायेगा अगर मुझसे कोई त्रुटी हुई हो तोह उसके लिए मैं छमा चाहूँगा धन्यवाद्

    soundarya के द्वारा
    May 13, 2012

    thank u sooo much 4 de meanings…<3333

ayshwarya rao के द्वारा
April 12, 2012

बहुत धनयवाद रहीम जी के दोहो के लिए, बचपन की याद ताजा हो गई।

    sachit के द्वारा
    June 8, 2012

    i love u ayshwarya 

ANAND SHARMA के द्वारा
November 11, 2011

प्रथम पंक्ति में रहीम दास जी कहते है कि उच्च विचार वालो से बुरी सांगत वाले जुड़े रहते है जिस प्रकार चन्दन के पेड़ से सर्प लिपटे रहते है जब बुराई को देखने के लिए निकला तो मुझे बुरा कोई न दिखा तो जब मैंने अपने अन्दर झांकर देखा तो पता चला कि मुझे से बुरा कोई नहीं है सब से बुरा में ही हू रहीम दास जी कहते है कि प्रेम के बंधन को कभी तोड़ना नहीं चाहिए क्योकि प्रेम के बंधन में एक बार जब गांठ पद जाती है तो वह हमेशा बनी रहती है जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाता है तो वह जुड़ता नहीं है अगर वह जुड़ भी जाता है है तो उसमे गांठ तो बनी ही रहती है बड़ा होने से कोई फायदा नहीं है बिना गुण के जिस प्रकार खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है पर छाया नहीं देता है और न ही फल देता है बस वो देखने में बड़ा होता है यदि हम सबसे मीठा बोलेंगे तो हमको चारो तरफ प्यार मिलेगा इसका मतलब यह है किजैसा करोगे बैसा भरोगे

    palak के द्वारा
    January 2, 2012

    good job

    priya के द्वारा
    January 16, 2012

    good work

    jack के द्वारा
    January 11, 2013

    कमेंट के लिए धन्यवाद http://www.jack.jagranjunction.com

Syeds के द्वारा
October 3, 2011

रहीम जी के दोहे पोस्ट करने के लिए धन्यवाद…

    sanjana के द्वारा
    October 15, 2011

    वेलकम

fkjaldfd के द्वारा
June 4, 2011

PBbbW7 , [url=http://vjcrczloslhp.com/]vjcrczloslhp[/url], [link=http://nicrpqezitxs.com/]nicrpqezitxs[/link], http://hdtsldcdnpzx.com/

cxtdahtvzfy के द्वारा
June 2, 2011

MA4CI2 , [url=http://fqzgkfwejdbc.com/]fqzgkfwejdbc[/url], [link=http://etsxjxvgcpul.com/]etsxjxvgcpul[/link], http://arnagcqlwhyk.com/

dnnuure के द्वारा
June 1, 2011

IuWSHN sgfypmmjohas

Hawk के द्वारा
June 1, 2011

No more s***. All posts of this qualtiy from now on

WordPress › Error

Error establishing a database connection

This either means that the username and password information in your wp-config.php file is incorrect or we can't contact the database server at . This could mean your host's database server is down.

  • Are you sure you have the correct username and password?
  • Are you sure that you have typed the correct hostname?
  • Are you sure that the database server is running?

If you're unsure what these terms mean you should probably contact your host. If you still need help you can always visit the WordPress Support Forums.