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नए जमाने के बच्चे : जरुर-जरुर पढ़ें हा हा !

Posted On: 16 Mar, 2011 में

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आजकल के बच्चे कितने प्यारे और नादान होते हैं इसका एक नजारा इस लेख में देख लीजिए. आज जमाना बहुत बदल गया है कल तक नाना-नानी की कहानी सुनने वाले बच्चे अब टीवी की कहानी देख बड़े हो रहे हैं. फिल्में तो बहुत दूर की बात है आजकल कार्टून में भी हमें कैरेक्टरों को प्यार करते नजर आते हैं. जिस उम्र में बच्चों को रामायण देखनी चाहिए उस उम्र में बच्चे मिकी माउस और मिनी का प्यार देखते हैं. चलिए आप भी देखिए आजकल के बच्चों की हंसी की फुलझड़ी.



Small-Kids-Mannequins11 वर्षीय रोहन और उसके पड़ोस में रहने वाली 10 सलोनी को साथ-साथ खेलते हुए यह एहसास हो जाता है कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं, और उन्हें शादी कर लेनी चाहिए…



रोहन सलोनी के पिता के पास पहुंच जाता है, और हिम्मत जुटाकर कह डालता है, “मिश्रा अंकल, मैं और आपकी बेटी सलोनी एक-दूसरे से प्यार करते हैं, और मैं आपसे शादी के लिए उसका हाथ मांगने आया हूं…”



मिश्रा जी को नन्हे शरारती रोहन की हरकत बेहद प्यारी लगती है और वह डांटने के बजाए मुस्कुराते हुए रोहन से पूछते हैं, “यार, तुम अभी सिर्फ 11 साल के हो, और तुम्हारे पास घर भी नहीं है… तुम और सलोनी रहोगे कहां…?”



रोहन तपाक से कहता है, “सलोनी के कमरे में, क्योंकि वह मेरे कमरे से बड़ा है, और वहां हम दोनों के लिए ज़्यादा जगह है…”



मिश्रा जी को अब भी रोहन की इस मासूमियत पर प्यार आता है, और वह फिर पूछते हैं, “ठीक है… लेकिन तुम लोग गुज़ारा कैसे चलाओगे… आखिर इस उम्र में तुम्हें नौकरी तो मिल नहीं सकती…?”



रोहन फिर बहुत शांत स्वर में जवाब देता है, “हमारा जेबखर्च है न… उसे 100 रुपये प्रति सप्ताह मिलता है, और मुझे 150 रुपये प्रति सप्ताह… इस हिसाब से हम दोनों के लगभग 1000 रुपये हर महीने मिल जाता है, जो हमारी ज़रूरतों के लिए काफी रहेगा…”



मिश्रा जी इस बात से भौंचक्के रह जाते हैं कि रोहन ने इस विषय पर इतनी गंभीरता से और इतनी आगे तक सोच रखा है…



सो, वह सोचने लगते हैं कि ऐसा क्या कहें कि रोहन को जवाब न सूझे, और उसे इस उम्र में सलोनी से शादी न करने के लिए समझाया जा सके…



कुछ देर बाद वह फिर मुस्कुराते हुए रोहन से सवाल करते हैं, “यह बहुत अच्छी बात है बेटे कि तुमने इतनी अच्छी तरह सब प्लान किया हुआ है, लेकिन यह बताओ, कि अगर तुम दोनों के बच्चे हो गए, तो क्या यह जेब खर्च कम नहीं पड़ेगा…?”



रोहन ने इस बार भी तपाक से जवाब दिया, “अंकल, हम बेवकूफ नहीं हैं… जब आज तक नहीं होने दिया, तो आगे भी ……….”

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297 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lolly के द्वारा
June 11, 2016

Kiitos vinkistä, tuosta ilomjtmnauutoskirsasta olen kuullut hyvää ennenkin. Ehkä luen sen jossain vaiheessa: joskus (melkein aina) on kyllä kivempi lukea ihan faktaa, ainakin kansantajuista faktaa, jostain aiheesta eikä opettavaista kaunokirjallisuutta. Ainakaan tässä Litiumissa tiedon ja juonen yhdistäminen ei toiminut. Sarasvatin hiekkaa kyllä suosittelen, se oli kiinnostava, vaikkei tosiaan kaunokirjallisesta näkökulmasta ihan nappisuoritus.

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 16, 2011

हा…हा हा… जैक भाई बहुत बेहतरीन.


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