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TULSIDAS KE DOHE IN HINDI- तुलसीदास के दोहे : जयंती विशेषांक

पोस्टेड ओन: 24 Jul, 2012 Uncategorized में

रहीम के दोहे अर्थ सहित:Rahim ke Dohe with meaning

हिन्दी साहित्य जगत के सिरोमणि कवि तुलसीदास को समर्पित एक बेहतरीन ब्लॉग. तुलसीदास जी को हनुमान चालिस नामक भय-मिटाऊ, सांस लाऊ और आसान मंत्र के लिए यह धरा उनकी हमेशा आभारी रहेगी.


तुलसीदास के दोहे : जयंती विशेषांक (TULSIDAS KE DOHE IN HINDI

महाकवि तुलसीदास कहते हैं कि

‘तुलसी’ जे कीरति चहहिं, पर की कीरति खोइ।

तिनके मुंह मसि लागहैं, मिटिहि न मरिहै धोइ।।

अर्थ: ‘‘दूसरों की निंदा कर स्वयं प्रतिष्ठा पाने का विचार ही मूर्खतापूर्ण है। दूसरे को बदनाम कर अपनी तारीफ गाने वालों के मुंह पर ऐसी कालिख लगेगी जिसे  कितना भी धोई जाये मिट नहीं सकती।’’


*******************

TULSIDAS KE DOHE IN HINDI

तनु गुन धन महिमा धरम, तेहि बिनु जेहि अभियान।

तुलसी जिअत बिडम्बना, परिनामहु गत जान।।

अर्थ: ‘‘सौंदर्य, सद्गुण, धन, प्रतिष्ठा और धर्म भाव न होने पर भी जिनको अहंकार है उनका जीवन ही बिडम्बना से भरा है। उनकी गत भी बुरी होती है।


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TULSIDAS KE DOHE IN HINDI

दोहा :बचन बेष क्या जानिए, मनमलीन नर नारि।

सूपनखा मृग पूतना, दस मुख प्रमुख विचारि।।

अर्थ : ‘वाणी और वेश से किसी मन के मैले स्त्री या पुरुष को जानना संभव नहीं है। सूपनखा, मारीचि, रावण और पूतना ने सुंदर वेश धरे पर उनकी नीचत खराब ही थी।’’


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तुलसीदास के दोहे अर्थ सहित

मार खोज लै सौंह करि, करि मत लाज न ग्रास।

मुए नीच ते मीच बिनु, जे इन के बिस्वास।।

अर्थ:  ‘‘वह निबुर्द्धि मनुष्य ही कपटियों और ढोंगियों का शिकार होते हैं। ऐसे कपटी लोग शपथ लेकर मित्र बनते हैं और फिर मौका मिलते ही वार करते हैं। ऐसे लोगों भगवान का न भगवान का भय न समाज का, अतः उनसे बचना चाहिए।


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तुलसीदास के दोहे अर्थ सहित

तुलसी’ जे कीरति चहहिं, पर की कीरति खोइ।

तिनके मुंह मसि लागहैं, मिटिहि न मरिहै धोइ।।

अर्थ: ‘‘दूसरों की निंदा कर स्वयं प्रतिष्ठा पाने का विचार ही मूर्खतापूर्ण है। दूसरे को बदनाम कर अपनी तारीफ गाने वालों के मुंह पर ऐसी कालिख लगेगी जिसे  कितना भी धोई जाये मिट नहीं सकती।’’


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तुलसीदास के दोहे अर्थ सहित

तनु गुन धन महिमा धरम, तेहि बिनु जेहि अभियान।

तुलसी जिअत बिडम्बना, परिनामहु गत जान।।

अर्थ:  ‘‘सौंदर्य, सद्गुण, धन, प्रतिष्ठा और धर्म भाव न होने पर भी जिनको अहंकार है उनका जीवन ही बिडम्बना से भरा है। उनकी गत भी बुरी होती है।


कबीर के दोहे अर्थ सहीत : Kabir ke Dohe

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Baba Tonk के द्वारा
June 29, 2014

Content was fantabulous itz really helpful for everybody…

aditi roxxxx के द्वारा
January 10, 2014

Nice content

amrutha के द्वारा
December 10, 2013

not nice.it didn’t help me.waste website

Pranay के द्वारा
November 24, 2013

its good i like it

yogesh के द्वारा
November 22, 2013

this is fantastic

usha के द्वारा
September 2, 2013

good




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