थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )

Shayri, jokes, chutkale and much more...

248 Posts

79662 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 355 postid : 948

कबीर दास के दोहे: Kabir ke Dohe in Hindi

Posted On: 29 Nov, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार।
साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।।

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि कटु वचन बहुत बुरे होते हैं और उनकी वजह से पूरा बदन जलने लगता है। जबकि मधुर वचन शीतल जल की तरह हैं और जब बोले जाते हैं तो ऐसा लगता है कि अमृत बरस रहा है।


शब्द न करैं मुलाहिजा, शब्द फिरै चहुं धार।
आपा पर जब चींहिया, तब गुरु सिष व्यवहार।।

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि शब्द किसी का मूंह नहीं ताकता। वह तो चारों ओर निर्विघ्न विचरण करता है। जब शब्द ज्ञान से अपने पराये का ज्ञान होता है तब गुरु शिष्य का संबंध स्वतः स्थापित हो जाता है।



कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास
काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास

भावार्थ- अपना शानदार मकान और शानशौकत देख कर अपने मन में अभिमान मत पालो जब देह से आत्मा निकल जाती हैं तो देह जमीन पर रख दी जाती है और ऊपर से घास रख दी जाती है।



गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न तर झगड़ा होय
अन्धों आगे रोइये अपना दीदा खोय


अर्थ: कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो अपनी बात समझता हो तो उससे कुछ कहें पर जो बुद्धि से अंधे हैं उनके आगे कुछ कहना बेकार अपने शब्द व्यर्थ करना है।





Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 4.27 out of 5)
Loading ... Loading ...

318 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

tani के द्वारा
September 26, 2014

i like all these dohe

    Tyanne के द्वारा
    June 11, 2016

    Where is ""Pabna Science and technology university"? I think this page should be updated as soon as possible by adding some public university name such as pabna scey2ce&#8n30;…universiti…I think u will do this..All other informations are nice.

ritika के द्वारा
September 26, 2014

okay very good

    Olivia के द्वारा
    June 9, 2016

    Such a deep anrwes! GD&RVVF


topic of the week



latest from jagran